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कैसे आम नागरिक तीन लाइन का सरकारी-आदेश टी.सी.पी. और जूरी सिस्टम पास करवाकर सालों-साल कोर्ट के चककर काटने से बच सकते हैं

सिर्फ तीन लाइन (धाराओं) का यह कानून कुछ ही समय में नागरिकों को सालों-साल कोर्ट-कचेहरी के चक्कर काटने से बचा सकता है और देश में सच्चे लोकतंत्र को मजबूत करेगा । इस कानून को पारदर्शी शिकायत प्रणाली या टी.सी.पी. भी कहा जाता है |

1. कोर्ट के सालों-साल चक्कर बचाने वाली, नागरिक प्रामाणिक शिकायत-प्रस्ताव प्रणाली = Citizen`s Verifiable Transparent Complaint Procedure (TCP ; टी.सी.पी.) का सारांश

    (1) जनता का जांचा जा सकने वाला मीडिया कोई भी नागरिक अपनी बात को 20 रुपये एफिडेविट पर रखकर, प्रधानमंत्री (या मुख्यमंत्री) वेबसाईट पर अपने वोटर आई.डी नंबर के साथ, कलेक्टर आदि निश्चित सरकारी दफ्तर पर जाकर स्कैन करवा सकता है, ताकि बिना लॉग-इन कोई भी इसे देख सकता है |

    (2) दर्ज एफिडेविट पर नागरिक का वोटर आई.डी. समर्थन / विरोध (2.1) कोई भी मतदाता धारा-1 द्वारा दर्ज अर्जी या एफिडेविट पर अपनी हाँ / ना प्रधानमंत्री (या मुख्यमंत्री) वेबसाईट पर, अपने वोटर आई.डी. नंबर के साथ दर्ज करवा सकता है पटवारी आदि सरकारी दफ्तर जाकर और 3 रुपया शुल्क देकर (एस.एम.एस. सिस्टम आने पर शुल्क 10 पैसे)

    (2.2) सुरक्षा धारा (जिसके कारण आम-नागरिक ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि ये प्रक्रिया पैसों से, गुंडों से या मीडिया द्वारा प्रभावित नहीं की जा सकती) नागरिक किसी भी दिन अपनी हाँ या न, बिना किसी शुल्क के रद्द कर सकता है

    (3) राय-संख्या बाध्य नहीं यह हाँ या ना अधिकारी, मंत्री, न्यायाधीश, सांसद, विधायक, आदि पर अनिवार्य नहीं होगा | उनका निर्णय अंतिम होगा |

बस ये इतना ही है । आसान शब्दों में कहें तो 'यदि कोई मतदाता अपना कोई प्रस्ताव/सुझाव/शिकायत आदि एफिडेविट अपने मतदाता पहचान पत्र संख्या के साथ प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री वेबसाईट या अन्य सरकार द्वारा निश्चित वेबसाईट पर स्कैन करके रखना चाहता है, तो निश्चित शुल्क लेकर उसे ऐसा करने दिया जाए''

2. कैसे ये प्रक्रिया सबूत को दबने से रोकेगी और कोर्ट के सालों-साल चक्कर से बचायेगी

मान लीजिए, आपके क्षेत्र में कोई अपराध हुआ है और आप उसकी एफ.आई.आर. लिखवाते हैं या गवाही देते हैं और आपको एफ.आई.आर. की कॉपी मिलती है तो उसे एक भ्रष्ट पुलिस अफसर अपराधियों के साथ सांठ-गाँठ करके आसानी से दबा सकते हैं | क्योंकि आप अपनी दर्ज एफ.आई.आर. या अर्जी जमा करने के बाद देख नहीं सकते | और आज के सिस्टम में गवाहों को गलत तत्व या गुंडे आसानी से डरा-धमका सकते हैं ; यहाँ तक गवाहों को जान से भी मार दिया जाता है | क्योंकि गुंडों को मालूम है कि अधिक लोगों के पास सबूत नहीं है और न ही कोई सिस्टम है जिसके द्वारा आम नागरिक लाखों-करोड़ों को प्रमाण दिखा सकता है | गुंडों को मालूम है कि गवाह को समाप्त करने या दबाने से सबूत समाप्त हो जायेंगे |

लेकिन यदि नागरिकों के पास ये नागरिक-प्रामाणिक विकल्प है कि वे अपनी बात या राय अपनी वोटर आई.डी. नंबर के साथ सार्वजनिक दर्शा सकते हैं, तो पुलिस अफसर देखेगा कि सबूत को दबाया नहीं जा सकता है, अब तो लाखों-करोड़ों को प्रमाण प्राप्त हो गए हैं | और गुंडों को भी समझ में आएगा कि गवाह ने अपना बयान सार्वजनिक कर दिया है - इसीलिए अब गवाह को मारने से कोई लाभ नहीं है | इस प्रकार गवाह की भी जान बच जायेगी और कोर्ट मामले का निबटारा भी जल्द होगा और अधिक न्यायपूर्वक होगा |

3. जूरी सिस्टम क्या है

जूरी सिस्टम में जज के बदले 15 से 1500 नागरिक, जिन्हें जूरी सदस्य कहा जाता है, वे फैसले करते हैं | ये 15 से 1500 नागरिक लाखों की मतदाता सूची में से लॉटरी से मतलब क्रम-रहित तरीके से चुने जाते हैं और हर मामले में नए जूरी सदस्य फैसला करते हैं | जूरी सिस्टम में जज सिस्टम की तुलना में, सेटिंग करना बहुत कठिन होता है, इसीलिए कोर्ट मामलों का फैसला जूरी सिस्टम में जल्दी और न्यायपूर्वक आता है | जूरी सिस्टम में फैसले कुछ हफ्तों में आते हैं सालों साल नहीं लगते |

जज सिस्टम की तुलना में जूरी सिस्टम में सेटिंग क्यूँ कठिन है, उसका उदाहरण - मान लीजिए, एक पेशेवर अपराधी और उसकी गैंग पर साल में 100 कोर्ट के मामले दर्ज होते हैं | अब ये 100 मामले 5-6 जज के पास जायेंगे जिन्हें सभी लोग जानते हैं | अपराधी या उसका आदमी जज के रिश्तेदार वकील के पास जा सकता है और सलाह लेने के बहाने चेक द्वारा जज के लिए रिश्वत दे सकता है | बदले में जज, मामले को लटका देते हैं और अपराधी को गवाह खरीदने/तोड़ने के लिए समय मिल जाता है | जज सिस्टम में यदि जज पैसे ले लेता है और अपराधी के पक्ष में निर्णय नहीं करता, तो उस जज को आगे रिश्वत नहीं मिलेगी | यदि जज अपराधी का काम कर देता है लेकिन अपराधी उसको पैसे नहीं देता, तो जज अपने सभी मित्र जजों को बोल देगा कि इस अपराधी का कोई काम नहीं करना क्योंकि ये काम करने के बाद भी पैसे नहीं देता | इस प्रकार, जज सिस्टम में अपराधी और जज की सेटिंग आसानी से हो जाती है

अब यदि जूरी सिस्टम लागू है जज सिस्टम के बदले, तो 5-6 जज के बदले 1500 व्यक्ति उन 100 कोर्ट मामलों का फैसला करेंगे | ये जूरी सदस्य कम से कम 10 सालों तक दोहराए नहीं जाते | जूरी मंडल सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक एक ही मामले को सुनता है | अपराधी को अंतिम क्षण तक ये नहीं मालूम होगा कि कौनसे लोग निर्णय करने के लिए चुने जायेंगे | किसी तरह उसे पता भी चल जाये, तो जूरी सदस्य और अपराधी के बीच में सेटिंग करना बहुत कठिन है |

आरोपी तथा उन 15 या अधिक जूरी सदस्यों को ये निश्चित करना कठिन होगा कि उन्हें फैसले के पहले रिश्वत का लेन-देन करना चाहिए या बाद में | यदि आरोपी ये कहता है कि वो रिहाई के बाद रिश्वत देगा, तो जूरी-सदस्य उस आरोपी के ऊपर विश्वास नहीं कर पायेंगे और यदि जूरी सदस्य ये कहता है कि रिश्वत पहले और रिहाई बाद में तो वह आरोपी जूरी सदस्यों के ऊपर विश्वास नहीं कर सकेगा | इसलिए, जूरी सिस्टम में मामला लटकाया नहीं जाता और फैसला जल्दी ही, कुछ ही हफ़्तों में आ जाता है | अधिक जानकारी के लिए लिंक smstoneta.com/prajaadhinbharat/chapter-21/ | प्रश्नोत्तरी righttorecall.info/004.h.htm या हमसे संपर्क करें |

4. नागरिक अपना वोटर आई.डी. नंबर समर्थन दर्ज करके प्रस्तावित जूरी कानून ला सकते हैं

9693938833 पर अपने मोबाइल इन्बोक्स से कृपया तीन एस.एम.एस. भेजें

       पहला एस.एम.एस. इस प्रकार रहेगा (मतलब दो स्टार सिम्बल के बीच में अपना वोटर आई.डी. नंबर डाल कर एस.एम.एस. करें)

*आपकी-वोटर-आई.डी.-संख्या*

       दूसरे एस.एम.एस. में केवल चार अंक रहेंगे जो टी.सी.पी. का समर्थन कोड है 0011

       तीसरे एस.एम.एस. में केवल चार अंक रहेंगे जो प्रस्तावित जूरी सिस्टम कानून का समर्थन कोड है 0051

आपका समर्थन इस लिंक पर आएगा sms.brvp.org/tcp | नोट  यदि किसी करणवश आपके पास वोटर आई.डी. नहीं है, तो आप पहला एस.एम.एस इस प्रकार से भेजें *abc1234567* ; दूसरा और तीसरा एस.एम.एस उसी प्रकार से रहेंगे जैसे ऊपर बताया गया है | फिर, आपका समर्थन अपंजीकृत इस पेज पर आएगा (sms.brvp.org/apanjikrit)

इसके अलावाआप (नागरिक) अपने प्रिय नेता या जनसेवक को निम्नलिखित एस.एम.एस. और ट्विट्टर द्वारा ये आदेश भेजकर और सभी को ऐसा करने के लिए कहकर ये प्रक्रिया लागू करवा सकते हैं

Kripya faisle nyay jald laane wali Jury prakriya mygov.in/comment/98814461 rajptr mein chhapwayein. FileSha1Hash = b3035ee77f7eba8c32785a2d97819a73f2f0a705 sms.brvp.org jaisa Public SMS Server banayein jismein logon ki SMS dwara raay unke voter ID no ke saath sabhi ko dikhe

(ऊपर दिए गए एस.एम.एस को डाउनलोड करने के लिए QR कोड स्कैन करें)

       ट्विट्टर का उदाहरण

@pmoindia Kripya Bhartiya rajptr mein chhapwayein - mygov.in/comment/98814461 sha1 - b3035ee77f7eba8c32785a2d97819a73f2f0a705 #Jury

यदि किसी क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में लोगों ने इसका वोटर आई.डी. नंबर प्रमाण के साथ सार्वजनिक, इन्टरनेट पर समर्थन दिखाया और जनसेवक से मांग किया तो उस क्षेत्र में ये कानून और सिस्टम आ जायेगा और उस क्षेत्र में अपराध, भ्रष्टाचार कम हो जायेगा |

पब्लिक एस.एम.एस. गिनती सर्वर tinyurl.com/PublicSMSServer ; फाइल हैश tinyurl.com/FileHashCampaignH देखें या हमसे संपर्क करें

5. प्रस्तावित निचली अदालतों में जूरी सिस्टम प्रक्रिया का सारांश (प्रधानमंत्री अध्यादेश द्वारा)

5.1. जनता का जांचा जा सकने वाला मीडिया [जिला कलेक्‍टर, प्रधानमंत्री के लिए निर्देश] कोई भी नागरिक अपनी बात को प्रधानमंत्री वेबसाईट पर अपने वोटर आई.डी नंबर के साथ, कलेक्टर आदि अन्य प्रधानमंत्री द्वारा बताये गए दफ्तर पर जाकर 20 रुपये प्रति पन्ना के एफिडेविट देकर स्कैन करवा सकता है, ताकि बिना लॉग-इन कोई भी इसे देख सकता है | स्पष्टीकरण- इस प्रक्रिया द्वारा नागरिक दूसरे नागरिकों को सबूत आदि अपनी बात दिखा सकते हैं ताकि भ्रष्ट अफसर सबूत आदि दबा नहीं सकें |

5.2. ागरिकों द्वारा बदले जा सकने वाला जूरी प्रशासक [मुख्यमंत्री के लिए निर्देश] मुख्यमंत्री हर जिले में एक जूरी प्रशासक नियुक्त करेंगे । ये नागरिकों द्वारा किसी भी दिन बदले जा सकेंगे | नौकरी जाने के डर के कारण, 99% अधिकारी अपना व्यवहार सुधार देंगे और अपना कार्य सही से करें और जो सही से से नहीं करेंगे उनको अच्छे लोगों से बदल दिया जायेगा |

5.3. महाजूरी मंडल और जूरी का गठन [जूरी प्रशासक, महाजूरी मंडल के लिए निर्देश] सभी हत्या, बलात्कार, भ्रष्टाचार, गो-हत्या, मिलावट के मामलों और विवाह झगडों में जूरी प्रशासक क्रम-रहित तरीके से महाजूरी मंडल के लिए 30 सदस्य चुनेगा जिनमें हर तीस दिन बाद 10 सदस्य नए सदस्यों से बदले जायेंगे | महाजूरी मंडल प्रथम दृष्टया सबूत के अनुसार निर्णय करेंगे कि जूरी द्वारा सुनवाई होनी चाहिए कि नहीं | जूरी प्रशासक हर मामले के लिए क्रम-रहित तरीके से मामले के अनुसार 15 से 1500 सदस्य चुनेगा |

5.4. जूरी सदस्यों द्वारा सुनवाई और फैसला [कोर्ट मुकदमा अध्यक्ष के लिए निर्देश] सुनवाई 11 बजे सुबह से लेकर 5 बजे शाम तक चलेगी । हर पक्ष बारी-बारी अपना पक्ष रखेगा | मुकदमा कम से कम 2 दिनों तक चलेगा ; सुनवाई कब समाप्त होगी जूरी सदस्य बहुमत अनुसार निर्णय करेंगे | सुनवाई के बाद जूरी कम से कम दो घंटे विचार करेगी | हर जूरी सदस्‍य दण्‍ड की वह मात्रा बताएगा जो वह उपयुक्‍त समझता है । और यह कानूनी दंड सीमा से अधिक नहीं होनी चाहिए । मुकदमा अध्यक्ष दण्‍ड की मात्राओं को बढ़ते क्रम में सजाएगा और जो सजा/अर्थदंड कम से कम 2/3 बहुमत जूरी सदस्यों द्वारा बताई गयी दंड से अधिक नहीं हो, घोषित होगी

उदहारण - यदि 15 सदस्य जूरी की बढ़ते क्रम में दंड मात्राएं 400,400,400,500,500,600,700,800,1000,1000,1200,1200,1400, 1500,1500 रुपये हैं तो 500 रुपये दंड की मात्रा घोषित होगी क्योंकि ये 2/3 जूरी सदस्यों द्वारा दिए गए दंड से अधिक नहीं है |

6. नानावटी मामला और भारत में जूरी सिस्टम क्यों समाप्त किया गया का सच

हमारे देश में 1959 के पूर्व एक कमजोर जूरी सिस्टम की न्यायप्रणाली थी | इस सिस्टम में निचली कोर्ट में क्रम रहित तरीके से 9 नागरिकों को चुना जाता जिले के वोटर सूची से और इन चुने हुए लोगों को जूरी सदस्य बोला जाता था और ये हर मामले के बाद बदले जाते थे | जज तय करता कि किस धारा के अंतर्गत मामला दर्ज होगा और जज ही तय करता था कि जूरी को कौनसे सबूत दिखाए जायें | जूरी को केवल और केवल दिखाए गए सबूत और दर्ज किये मामले के धारा के अंतर्गत दोषी या निर्दोष बोलना होता था | उस समय इस कमजोर जूरी सिस्टम में अधिकतर अधिकार जज के पास ही थे, न कि जूरी के पास | ये जूरी सिस्टम कमजोर होने के बावजूद समाज, देश के लिए काफी लाभदायक था | सजा होने के डर से उस समय लोग मिलावट कम करते थे, हफ़्ता-गिरी कम होती थी और कोर्ट-कचहरी में रिश्वतबाजी कम होती थी | एक साजिश के अंतर्गत, नानावटी मामले का बहाना बनाकर ये प्रणाली समाप्त की गई

नानावटी एक नौसैनिक अफसर था | उसने एक अंग्रेज से शादी की थी | उसे पता चला कि उसकी पत्नी और उसके मित्र, आहूजा के अवैध शारारिक सम्बन्ध हैं | गुस्से में उसने आहूजा को मार दिया और अपने आप को आत्म-समर्पण किया | इस मामले को गलत तरीके से मीडिया में पेश करके 1959 में भ्रष्ट जज और भ्रष्ट नेहरु ने इसको समाप्त कर दिया | नानावटी मामले का बहाना बनाकर जूरी के विरुद्ध बोलने वालों को इस प्रश्न का उत्तर देना चाहिए कि जज ने धारा 302 के साथ-साथ कम सजा वाली हत्या की धाराएं क्यों नहीं लगवाई जबकि नानावटी ने स्वयं कबूल किया था कि उसने आहूजा को मारा है ? क्योंकि यदि कम अपराध वाली धाराएं होती तो जूरी उन धाराओं के अंतर्गत कम सजा दे देते नानावटी को जो अहुजा के परिवार वाले, उनसे मिले भ्रष्ट जज, भ्रष्ट मीडिया नहीं चाहते थे |

नानावटी मामला एक ऐसा मामला था जिसमें काफी राजनैतिक प्रभाव था | अहुजा के परिवार वालों ने जज आदि से सेटिंग करके नानावटी पर पूर्व-द्वेष के साथ अहुजा को मारने का आरोप लगाया | ये बात स्पष्ट थी कि नानावटी ने आहूजा को मारा है क्योंकि नानावटी ने स्वयं आत्म-समर्पण किया था | फिर भी, न तो वकीलों ने और न ही जज ने कम अपराध वाली धाराओं के अंतर्गत मुकदमा चलवाया | सीधे 302 धारा पर ही मुकदमा चला | क्योंकि आहूजा के परिवार वाले चाहते थे कि नानावती को अधिक से अधिक सजा हो और इसके लिए उन्होंने जज आदि पर प्रभाव डाला था | लेकिन आहूजा के वकील ये पूरी तरह से साबित न कर सके कि नानावटी ने पूर्व-द्वेष से आहूजा को मारा है | इसीलिए, जूरी ने संदेह का लाभ देते हुए उसे छोड़ दिया और 302 धारा का दोषी नहीं माना | ये मुद्दा मीडिया ने भी नहीं उठाया था कि जूरी ने 302 के अंतर्गत नानावटी को निर्दोष माना है | इससे ये स्पष्ट होता है कि मीडिया को भी प्रभावित किया गया था जूरी के पक्ष में नहीं बोलने के लिए |

भ्रष्ट जज और नेताओं ने जज आदि का दोष छुपाने के लिए जूरी पर बिना कोई प्रमाण दिए इल्जाम लगा दिया | जूरी के किसी भी सदस्य ने ऐसा कोई भी बयान नहीं दिया कि उसने मीडिया के प्रभाव में फैसला किया है | न ही कोई अध्ययन किया गया कि न्यायपालिका की कौनसा प्रक्रिया श्रेष्ट है | जूरी उस समय भ्रष्ट जजों को अपना काला धंधा करने से रोकते थे | और कोई कारण समझ में नहीं आता, क्योंकि अपील में कोई जूरी नहीं थी और अक्सर अपील आदि आगे द्वारा ही प्रभावशाली लोग छूट जाते थे | अंत में, नेहरू पर प्रभाव होने के कारण ही नानावटी को छूट मिली और इसपर किसी भी जज आदि ने आपत्ति नहीं उठाई क्योंकि जूरी के समाप्त किये जाने से भ्रष्ट जज नेताओं से प्रसन्न थे | दूसरे देश जैसे हांगकांग के नागरिकों ने अपने यहाँ की कमजोर जूरी सिस्टम को सुधार दिया लेकिन हमारे देश में सिस्टम को सुधारने के बदले उसे समाप्त कर दिया गया जिससे न्याय प्रणाली और बुरी हो गयी |

7. राष्ट्रीय न्यायिक आयोग (एन.जे.सी.) - एक बेकार (अनुपयोगी) विचार है

देश के प्रसिद्ध बुद्धिजीवियों ने राष्ट्रीय न्यायिक आयोग (एन.जे.सी.) की मांग की है, जिसमें लगभग 5-15 लोगों के पास ही सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के जजों को नियुक्त करने या हटाने का अधिकार होगा । ये 5-15 लोग बहुराष्‍ट्रीय कम्‍पनियों और उच्च्वर्गों के पास बिक जाएंगे और राष्ट्रीय न्यायिक आयोग के आने के बाद सभी कोर्ट बहुराष्‍ट्रीय कम्‍पनियों और उच्च्वर्गों की जायदाद बन जाएंगे । हम जूरी सिस्टम का समर्थन करते हैं और राष्ट्रीय न्यायिक आयोग (एन.जे.सी.) प्रस्ताव का विरोध करते हैं । इतना ही नहीं, प्रमुख बुद्धिजीवियों द्वारा मांग किए गए एन.जे.सी. प्रस्ताव में ऐसी कोई प्रणाली नहीं है, जिसके तहत देश की हम आम जनता एन.जे.सी. के सदस्यों को उनके पद से हटा सके या उन्हें बदल सकें । इस तरह, एन.जे.सी. के सदस्य ही उच्च वर्गीय लोगों के हाथ की भ्रष्ट कठपुतली बन जायेंगे

राष्ट्रीय न्यायिक आयोग (एन.जे.सी.) केवल उच्च वर्गीय लोगों का सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों पर नियंत्रण को मजबूत करेगा | राष्ट्रीय न्यायिक आयोग (एन.जे.सी.) ये सुनिचित करेगा कि उच्च वर्गीय लोगों को केवल 5-10 एन.जे.सी. सदस्यों को ही रिश्वत देनी होगा और उनके द्वारा, वे सभी 25 सुप्रीम कोर्ट जज और 600 हाई कोर्ट जजों को नियंत्रित कर सकते हैं (निष्काशन की धमकी द्वारा)